जानें कैसे "धन और आकर्षण का नियम" आपकी आर्थिक स्थिति को बदल सकता है! सकारात्मक सोच और ब्रह्मांड के नियमों का उपयोग करके अपनी वित्तीय सफलता को आकर्षित करें। इस ब्लॉग पोस्ट में, धन प्राप्ति के लिये सरल टिप्स और वास्तविक जीवन की कहानियां जानें!
मनी एण्ड द लॉ ऑफ अट्रैक्शन (Money and the Law of Attraction)
आप सोचेंगे कि इस पुस्तक में हमें ऐसे तरीके बताए गए है, जिनसे हम लॉ ऑफ अट्रैक्शन का इस्तेमाल करके अपने जीवन में पैसों को आकर्षित करने के लिए इसके प्रिंसिपल्स को अप्लाई करेंगे। लेकिन यह बुक केवल धन को आकर्षित करने तक सीमित नहीं है। बल्कि एक अच्छे जीवन के लिए जरूरी सभी आवश्यक चीजें जैसे प्यार, करियर, सफलता, शांति, सम्मान और ऐसे लोगों को आकर्षित करने के बारे में है। जो आपकी जिंदगी को खास बनाते हैं।
यह पुस्तक दो भागों में बटी हुई है।
पहले भाग में हमारे जीवन के लिए जरूरी सभी चीजों को आकर्षित करने के लिए लॉ ऑफ अट्रैक्शन के इस्तेमाल के तरीके पर बात की गई है।
दूसरे भाग में बताया गया है कि किस प्रकार हम इस शक्ति के इस्तेमाल से असीम धन को आकर्षित कर सकते हैं।
भाग पहला
लेखिका कहती हैं कि जब से इस ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई है, तब से लॉ ऑफ अट्रैक्शन काम कर रही है। हम सभी एक खास तरह की तरंगो का हिस्सा हैं। और अट्रैक्शन उन्हीं वाइब्रेशन के प्रभाव से चीजों को आकर्षित करता है। यह वाइब्रेशन हमारी सोच से निकलती है। जैसा हम सोचते हैं, हमारे दिमाग से ठीक वैसी ही वाइब्रेशन निकलती है और हमारे वातावरण से एक जैसी वाइब्रेशन वाली चीजों को आकर्षित करती है। उन्हें ट्रैक करती है। मान लीजिए आप घबराया हुआ महसूस कर रहे हैं, तो आपकी वाइब्रेशन भी ऐसे लोगों को अपने आसपास ढूढेगी, जो अपनी जिंदगी से परेशान हैं और घबराए हुए हैं। ऐसे लोग आपको उन परिस्थितियों से बाहर निकलने की बजाय आपको उसी में डुबाने की कोशिश करेंगे। इसी तरह मान लीजिए आप इस तरह की सोच के गुलाम हो चुके हैं कि भविष्य में आपके पास पैसों की कमी हो जाएगी। तो आप ऐसी ही परिस्थिति को अपनी ओर आकर्षित करेंगे और पैसा आपसे दूर चला जाएगा। इन सब का कारण लॉ ऑफ अट्रैक्शन है। क्योंकि यह उन्हीं चीजों से जोड़ती है, जैसी वाइब्रेशन उस समय आपके दिमाग से निकलती है।
भाग दूसरा
अट्रैक्शन की शक्ति से लेखिका कहती हैं कि जब भी आप नेगेटिव इमोशंस को फील करें तो उसकी पहचान करें और स्वयं से यह सवाल पूछें कि आप ऐसा क्यों फील कर रहे हैं? आप क्या चाहते हैं? क्योंकि आप हमेशा तो ऐसा फील नहीं करते। इस तरह आप अपना सारा ध्यान इस सोच पर केंद्रित कर देते हैं कि आप वास्तव में चाहते क्या हैं और इसी बिंदु पर हमारी सोच बदल जाती है। हमारा ध्यान हमारे नकारात्मक सोच से हट जाता है। और यहीं से पॉजिटिव अट्रैक्शन की शुरुआत हो जाती है।
मैं आपको एक उदाहरण देना चाहूंगा, मान लीजिए मैं बहुत दुखी हूं, बहुत उदास हूं, तो ऐसे समय में या तो मैं अपनी सोच पर अपना ध्यान लगाऊंगा कि आखिर मैं ऐसा क्यों सोच रहा हूं? या फिर मैं ईश्वर का नाम लूंगा। ऐसा मैं बार-बार उनका नाम दोहरा कर भी कर सकता हूं और उनके लिए गाए गए गीतों को गाकर भी कर सकता हूं। जैसे मान लीजिए मैं एक गीत गाता हूं, “चाँद तारे, तोड़ लाऊ, सारी दुनिया पर में छाऊ, बस इतना सा ख्वाब है।” अब कुछ पल पहले मैं बहुत बुरा महसूस कर रहा था और जैसे ही मैंने यह गीत गाया, तो आप भी यह महसूस कर सकते हैं कि अब मैं अच्छा महसूस कर रहे होंगे। तो इस तरह हमें जो चीजें सकारात्मक बनाती हैं हमें उसका प्रयोग खुद को पॉजिटिव बनाने के लिए करना चाहिए और इससे हमें एक ऐसी ऊर्जा मिलती है। जिससे हम जिंदगी की सभी चुनौतियों का डटकर सामना करने के लिए फिर से तैयार हो जाते हैं। और हमारी सारी नकारात्मकता दूर चली जाती है।
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